विमिन पॉवर की जड़ में डॉ. आंबेडकर

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आनंद श्रीकृष्ण।।
अब से सौ 
साल पहले, जुलाई, 1913 के तीसरे सप्ताह में डॉ. आंबेडकर न्यूयॉर्क पहुंचे और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। वहां का वातावरण उदार और समानता पर आधारित था। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे। अर्थव्यवस्था में महिलाओं का सीधा योगदान था। हर क्षेत्र में वे पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहीं थी। आंबेडकर के लिए यह एक नया ही संसार था। महिलाओं के सशक्तीकरण से वे बहुत प्रभावित हुए और पहला सपना उन्होंने यही देखा कि भारत लौटकर यहां की महिलाओं को भी वे इसी तरह सशक्त बनाने का प्रयास करेंगे।

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जाति प्रथा के ख़िलाफ़ बिगुल

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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दक्षिण एशिया में जाति प्रथा के अभिशाप से लोगों को बचाने का बिगुल बजाया है.

इन विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशियाई देशों में क़रीब 26 करोड़ लोग जाति प्रथा के शिकार होकर अपना जीवन बहुत दयनीय हालात में जीते हैं और उनके साथ हर क्षेत्र में भेदभाव होता है. इन विशेषज्ञों ने आहवान कि है कि इन लोगों को इस चंगुल से निकाले जाने की सख़्त ज़रूरत है.

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